Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Tuesday, 24 March 2015

श्री राम चालीसा ।



श्री रघुबीर भक्त हितकारी । सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई ।।
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं । ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं ।।
जय जय जय रघुनाथ कृपाला । सदा करो सन्तन प्रतिपाला ।
दूत तुम्हार वीर हनुमाना । जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना ।।
तव भुजदण्ड प्रचंड कृपाला । रावण मारि सुरन प्रतिपाला ।।
तुम अनाथ के नाथ गोसाई । दीनन के हो सदा सहाई ।।
ब्रम्हादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हारो यश गावैं ।।
चारिउ बेद भरत हैं साखी । तुम भक्तन की लज्जा राखी ।।
गुण गावत शारद मन माहीं । सुरपति ताको पार न पाहीं ।।
 नाम तुम्हार लेत जो कोई । ता सम धन्य और नहिं होई ।।
राम नाम है अपरम्पारा  । चारिउ वेदन जाहि पुकारा ।।
 गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो । तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों ।।
शेष रटत नित नाम तुम्हारा । महि को भार शीश पर धारा ।।
फूल समान रहत सो भारा । पाव न कोउ न तुम्हारो पारा ।।
भरत नाम तुम्हरो उर धारो । तासों कबहु न रण में हारो ।।
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा । सुमिरत होत शत्रु कर नाशा।।
लषन तुम्हारे आज्ञाकारी । सदा करत सन्तन रखवारी ।।
ताते रण जीते नहिं कोई । युद्ध जुरे यमहूं किन होई ।।
महालक्ष्मी धर अवतारा । सब विधि करत पाप को छारा ।।
सीता राम पुनीता गायों । भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ।।
घट सों प्रकट भई सो आई । जाको देखत चन्द्र लजाई  ।।
सो तुमरे नित पाँव पलोटत । नवो निद्धि चरणन में लोटत ।।
सिद्धि अठारह मंगलकारी । सो तुम पर जावे बलिहारी ।।
औरहु जो अनेक प्रभुताई । सो सीतापति  तुमहिं बनाई ।।
इच्छा ते कोटिन संसारा । रचत न लागत पल की वारा ।।
जो तुम्हरे चरणन चित लावै । ताकी मुक्ति अवसि हो जावै ।।
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा । निर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ।।
सत्य सत्य जय सत्य ब्रत स्वामी ।सत्य सनातन अन्तर्यामी ।।
सत्य भजन तुम्हरो जो गावैं । सो निश्चय चारों फल पावै ।।
सत्य सपथ गौरीपति कीन्हीं । तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं ।।
सुनहु राम तुम तात हमारे । तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे ।।
तुमहिं देव कुल देव हमारे ।तुम गुरूदेव प्राण के प्यारे ।।
जो कुछ हो सो तुम ही राजा । जय जय जय प्रभु राखो लाजा ।।
राम अात्मा पोषण हारे । जय जय जय दशरथ के दुलारे ।।
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा । नमो नमो जय जगपति भूपा ।।
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा ।नाम तुम्हार हरत संतापा ।।
सत्य शुद्ध देवन मुख गाया । बज्री दुन्दुभी शंख बजाया ।।
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन ।तुम ही हो हमारे तन मन धन ।।
याको पाठ करे जो कोई । ज्ञान प्रकट ताके उर होई ।।
आवागमन मिटै तिहि केरा । सत्य वचन माने शिव मेरा ।।
और आस मन में जो होई । मनवांछित फल पावे सोई ।।
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै । तुलसीदल अरू फूल चढावै ।।
साग पत्र सो भोग लगावै । सो नर सकल सिद्धता पावै ।।
अन्त समय रघुवर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ।।
श्री हरिदास कहै अरू गावैो । सो बैकुंठ धाम को जावै ।।

        ।।   दोहा ।।
सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय ।
हरिदास हरि कृपा से , अवसि भक्ति को पाय ।।
राम चालीसा जो पढे, राम चरण चित लाय ।।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय ।।


Monday, 23 March 2015

माँ दुर्गा के बत्तीस नामों की माला। (दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला )

दुर्गा   दुर्गतिशमनी  दुर्गापद्विनिवारिणी ।    दुर्गमच्छेदिनी  दुर्गसाधिनी  दुर्गनाशिनी  ।।
दुर्गतोद्धारिणी  दुर्गनिहन्त्री   दुर्गमापहा  ।    दुर्गमज्ञानदा  दुर्गदैत्यलोकदवानला ।।
दुर्गमा दुर्गमालोका  दुर्गमात्मस्वरूपिणी ।  दुर्गमार्गप्रदा  दुर्गमविद्या   दुर्गमाश्रिता  ।।
दुर्गमज्ञानसंस्थाना  दुर्गमध्यानभासिनी  ।  दुर्गमोहा  दुर्गमगा  दुर्गामार्थस्वरूपिणी ।।
दुर्गमासुरसंहत्री  दुर्गमायुधधारिणी ।   दुर्गमांगी दुर्गमता दुरगम्या दुर्गमेश्वरी ।।
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी । नामावलिमिमां यस्तु दुर्गया मम मानव: ।।

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मेरे राघव जी उतरेंगे। पार हो ,गंगा मैंया धीरे बहो ।


मेरे राघव जी उतरेंगे पार हो , गंगा मैंया धीरे बहो ।
धीरे बहो धीरे बहो हौले बहो ,गंगा मैंया धीरे बहो ।
मेंरे प्रभू जी उतरेंगे पार हो , गंगा मैंया धीरे बहो ।

आज सफल हुये नयन हमारे, प्रभू जी विराजे हैं नाव हमारे-२
ये तो जग के पालनहार ,गंगा मैंया धीरे बहो 
मेंरे  प्रभू जी उतरेंगे पार हो ,गंगा मैंया धीरे बहो ।

भव सरिता के खेवनहारे , आज हमारे नाव पधारे ।---२
ये तो दशरथ राजकुमार ,गंगा मैंया धीरे बहो ।
मेंरे राघव जी उतरेंगे पार हो, गंगा मैंया धीरे बहो ।

सीता लखन ,प्रभू पार उतारो, बिगड़ी जनम आगे की सुधारो।------२
ये तो रघुबर प्राणाधार ,गंगा मैंया धीरे बहो।
मेंरे राघव जी उतरेंगे पार हो ,गंगा मैंया धीरे बहो।

केवट उतरी दंडबत कीना, प्रभू उतराई मणि मुद्रिका दीना।
कहें कृपालु लेलो उतराई, केवट चरण पकड़ अकुलाई ।
अब कछु नाथ न चाहिये मोरे, दीन दयालु अनुग्रह तोरे।
फिरती बार मैं जो कछु पावा ,समझ प्रसाद मैं सिर धरि पावा।
मेंरे राघव जी उतरेंगे पार हो, गंगा मैंया धीरे बहो----२ 





Tuesday, 17 March 2015

भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी (राम चरित मानस )



भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी ।
  हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी  ।।
   लोचन अभिरामा तनु घन स्यामा निज आयुध भुज चारी ।
     भूषण बनमाला नयन बिसालासोभा सिंधु खरारी ।।

    कह दुख कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
       माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता ।।
     करूना सुख सागर सब गुन आगर जाहिं गावहिं श्रुति संता।
      सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता । ।

     ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै ।
       मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ।।
       उपजा जब ग्याना प्रभु मुस्काना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
         कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै। ।

      माता पुनि बोली सो मति डोली तजहूँ तात यह रूपा ।
      कीजै सिसुलीला अति प्रिय सीला यह सुख परम अनूपा ।।
         सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा ।
       यह चरित जे गावहिं हरि पद पावहिं ते न परहिं भवतूपा ।।

          बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।
           निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ।।
    

Monday, 16 March 2015

राधे तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए।



 राधे तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए ,
  सच कहती हूँ, मैया मेरी , तकदीर बदल जाए।
 राधे तेरे चरणों की................................

   सुनते हैं तेरी रहमत, दिन रात बरसती है-२
  एक बूँद ही मिल जाए, जीवन ही बदल जाए।
  राधे तेरे चरणों की.................................

     ये मन बड़ा चंचल है, तेरा भजन नहीं करता -२
     जितना इसे समझाऊँ ,उतना ही मचल जाए।
     राधे तेरे चरणों की.....................,.......,,,,

      नज़रों से गिराना ना, चाहे जितनी सजा देना -२
      नज़रों से जो गिर जाएँ, मुश्किल है सम्भल पायें।
     राधे तेरे चरणों की गर.................... ...........

       माँ इस जीवन की , बस इतनी तमन्ना है।
       तू सामने हो मेरे, और प्राण निकल जाये ।
       राधे तेरे चरणों की ,गर धूल ही मिल जाये।
      सच कहती हूँ, मैया मेरी तक़दीर बदल जाये।
      राधे तेरे चरणों की...............................

मने चाकर राखो जी ।( मीरा जी के भजन )




  मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
            गिरधारीलाला चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
  
      चाकर रहसूँ ,बाग लगासूँ, नित उठि दरसन पासूँ ।
 बृंदावन की कुंज गली में, गोविन्द लीला गाँठूँ ।
      मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।

        चाक गली में दरसन पाऊँ, सुमिरन पाऊँ फरजी।
         भाव -भक्ति जागीरे पाऊँ , तीनों माता सरसी ।
          मने चाकर राखो जी , मने चाकर राखो जी ।

          मोर मुकुट पीताम्बर सोहे ,गले बैजन्तीमाला ।
          बृंदावन में धेनु चरावे , मोहन मुरलीवाला ।
           मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।

          ऊँचे-ऊँचे महल बनाऊँ , बीच-बीच राखूँ बारी।
           साँवरिया के दरसन पाऊँ ,पहन कुशुमरी साड़ी।
            मने चाकर राखो जी ,मने चाकर राखो जी ।

           जोगी आया जोग करन को, तप करने सन्यासी।
            हरि भजन को साधु आये, बृंदावन के बासी ।
            मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।

             मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा, रूते रहो जी धीरा ।
             आधी रात प्रभु दरसन दीनों, जमुना जी के तीरा।
             मने चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी।
             गिरधारी लाला , चाकर राखो जी, मने चाकर राखो जी ।