Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Monday, 20 June 2016

Shree Krishna Stuti (श्री कृष्ण स्तुति ) ।



              
 

श्री कृष्णचन्द्र कृपालु भजु मन, नन्द नन्दन यदुवरम् ।
                  आनन्दमय सुखराशि ब्रजपति, भक्तजन संकटहरम् ।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक उर, बनमाल कौस्तुभ सुन्दरम् ।
                     आजानु भुज पट पीत धर, कर लकुटि मुख मुरली धरम् ।
बृष भानुजा सह राजहिं प्रिय , सुमन सुभव सिंहासनम् ।
                       ललितादि सखिजन सेवहिं, लिए छत्र चामर व्यंजनम् ।
पूतना-तृण-शंकट-अधबक , केशि-व्योम-विमर्दनम् ।
                        रजक-गज-चाणूर-मुष्टिक , दुष्ट कंस निकन्दनम् ।
गो-गोप गोपीजन सुखद , कालीय विषधर गंजनम् ।
                         भव-भय हरण अशरणशरण , ब्रह्मादि मुनि-मन रंजनम् ।
श्याम-श्यामा करत केलि , कालिन्दी तट नट नागरम् ।
                           सोइ रूप मम हिय बसहुँ नित , आनन्दघन सुख सागरम् ।
इति वदति सन्त सुजान श्री सनकादि मुनिजन सेवितम् ।
                           भव-मोतिहर मन दीनबन्धो , जयति जय सर्वेश्वरम् ।

Tuesday, 31 May 2016

ShreeKrishnashtakam ( श्रीकृष्णाष्टकम् )




भजे  व्रजैकमण्डनं   समस्तपापखण्डनं 
 स्वभक्तचित्तरंजनं  सदैव  नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं  सुनादवेणुहस्तकं
ह्वानंगरंगसागरं   नमामि    कृष्णनागरम्  ।। १  ।।

मनोजगर्वमोचनं      विशाललोललोचनं
विधूतगोपशोचनं   नमामि  पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं        स्मितावलोकसुन्दरं 
महेन्द्रमानदारणं   नमामि   कृष्णवारणम्  ।।२ ।।

कदम्बसूनूकुण्डलं    सुचारुगण्डमण्डलं
व्रजांगनैकवल्लभं  नमामि  कृष्ण दुर्लभम् ।
यशोदया  समोदया सगोपया  सनन्दया 
युतं  सुखैकदायकं नमामि  गोपनायकम्  ।।३ ।।

सदैव  पादपंकजं   मदीयमानसे   निजं
दधानमुत्तमालकं  नमामि  नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं    समस्तलोकपोषणं
समस्तगोपमानसं नमामि  कृष्णलालसम् ।।४ ।।

भुवो   भरावतारकं   भवाब्धिकर्णधारकं
यशोमतीकिशोरकं  नमामि  दुग्धचोरकम्।
दृगन्तकान्तभंगिनं       सदासुबालसंगिनं
दिने  दिने  नवं  नवं  नमामि  नन्दसंभवम् ।।५ ।।

गुणाकरं   सुखाकरं   कृपाकरं   कृपावरं
सुरद्विषन्निकन्दनं   नमामि   गोपनन्दनम् ।
नवीनगोपनागरं        नवीनकेलिलम्पटं
नमामि  मेघसुन्दरं    तडित्प्रभालमत्पटम् ।।६ ।।

समस्तगोपनन्दनं       हृदम्बुजैकमोहनं
नमामि   कुंजमध्यगं   प्रसन्नभानुशोभनम् ।
निकामकामदायकं     दृगन्तचारूसायकं
रसालवेणुगायकं   नमामि  कुंजनायकम् ।।७ ।।

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
नमामि  कुंजकानने  प्रवृद्धवह्निपायिनम्।
यदा तदा यथा तथा तथैव  कृष्णसत्कथा
मया सदैव गीयतां तथा कृपा विघीयताम् ।
प्रमाणिकाष्टकद्वयं     जपत्यधीत्य   य: 
पुमान्भवेत्स  नन्दनन्दने  भवे  भवे  सुभक्तिमान् ।।८ ।।



Wednesday, 18 May 2016

दादी या नानी माँ के घरेलू प्राथमिक उपचार

(इलायची का उपयोग)  १-   मुँह में छाले हो तो इलायची को पीसकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से छाले ठीक होते हैं।

२-   २-३  ग्राम इलायची को पीसकर मिश्री मिलाकर लेने से पेशाब कम अाना या जलन होने की समस्या में शीघ्र लाभ होता है।

३-     हिचकी नहीं रुक रही हो तो २ इलायची व ३ लौंग को पानी में चाय की तरह थोड़ी देर उबाल कर पिलाने से लाभ होता है।यदि एक बार में ठीक नहीं हुआ तो यह प्रयोग दिन में ३-४ बार कर सकते हैं।

(काली मिर्च )-----१-  यदि खाँसी के कारण सो नहीं पा रहे हैं तो १-२ काली मिर्च मुँह में रखकर चूसते रहने से खाँसी में आराम हो जायेगा तथा नींद भी आ जायेगी।

२-      थोड़ा अदरक व ३-४ काली मिर्च मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से खाँसी में तुरन्त आराम होता है।

३--    शीतपित्त होने पर ४-५ कालीमिर्च पीसकर उसमें १ चम्मच गर्म घी और शक्कर मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

४--   खाँसी व उसके साथ कमजोरी भी हो तो २० ग्राम कालीमिर्च, १०० ग्राम बादाम , १५० ग्राम मिश्री मिलाकर कूटकर पाउडर बनाकर किसी साफ शीशी में भरकर रख लें, सुबह - शाम गर्म दूध के साथ अथवा गर्म पानी से लेने से पुरानी खाँसी भी ठीक हो जाती है।इससे कमजोरी में भी लाभ होता है।


(मेथी का उपयोग-)-------

१-     एक चम्मच मेथी को एक कप पानी में भिगो दें। प्रात: उस पानी को पीकर मेथी को भी चबाकर खायें।मधुमेह में इससे लाभ होगा व इससे होने वाली कमजोरी, वातरोगों व हृदयरोग में भी फायदा होगा।

२---- मेथी , हल्दी  तथा सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर करके रखें। १-१ चम्मच सुबह -शाम गर्म पानी या गर्म दूध के साथ लेनें से जोड़ों के दर्द या सभी तरह के वात रोग या सूजन में लाभ होता है।

३---     पुराने अर्थराइटिस के रोगियों को लम्बे समय तक मेथी का प्रयोग करने से चमत्कारी लाभ होता है।

४---  आर्थराइटिस व मधुमेह के रोगियों को मेथी को अंकुरित करके भी प्रतिदिन सेवन करने से लाभ मिलता है।

५---  सर्दी तथा कफ में मेथी एवं अदरक का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।


(अदरक का प्रयोग-)----- 

१--  भोजन के आरंभ में ३-४ छोटे टुकड़े अदरक लेने से भूख बढ़ती है तथा भोजन के पश्चात लेने से भोजन पचता है।

२--- २ चम्मच अदरक के रस में थोड़ा शहद मिलाकर लेने से सर्दी जुकाम एवं खाँसी में फायदा मिलता है।

३-----  यदि ठंढ से दाँत में दर्द हो तो एक टुकड़ा अदरक को दाँत में दबाकर रखने से तुरन्त लाभ मिलेगा।

४------  अदरक को भूनकर चूसने से खाँसी में लाभ होता है।

५-------   २-३ ग्राम सौंठ पाउडर में१/२ या १ ग्राम दालचीनी मिलाकर दूध या पानी के साथ लेने से पाचन ठीक रहता है तथा हृदय को ताकत मिलता है।

६------   अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से मन्दाग्नि दूर होकर भूख लगती है।

७-------  २ ग्लास पानी में ५ ग्राम अदरक कूटकर उबालकर उसमें नींबू का रस तथा थोड़ा शहद डालकर सुबह खाली पेट गुनगुना पीने से मोटापा कम होता है।

Tuesday, 17 May 2016

Jhanki Karne ko Aaj , Mai ShreeJee Ke Dwar Chali.


सपने को साकार बनाया, करके कृपा मुझे पास बुलाया ,
मुझ अनाथ को श्रीनाथ ने ,  देकर  प्रेम सनाथ बनाया ,
अपने पतिदेव के साथ चली ,   मेरी नैया पार लगी ।
झाँकी करने को आज मैं ,  श्रीजी के द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद ,       मेंरी    तकदीर  खुली  ,
झाँकी करने को आज ,  मैं श्रीजी के द्वार चली ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण-------------------।

मोर चन्द्रिका शीश पे सोहे , श्याम छवि सब का मन मोहे ,
मुझे हाथ से पास बुलावे ,  कटी हाथ में कमल धरावे ,
मेरी नाथ  नगरिया,  प्रभु की बगिया,  महके गली - गली,
झाँकी करने को आज , मैं   श्रीजी के   द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद-------------------- ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण --------------।


जाकर सन्मुख बैठ धरूँगी , निरख - निरख छवि दरश करूँगी ,
सेवा करके श्रीनाथ की    ,  जीवन अपना सफल करूँगी ,
माला भी मैं गूथूँगी  ,   चुन -  चुन कर  कली - कली ।
झाँकी करने को आज मैं ,  श्रीजी के द्वार चली ।
बहुत दिनों के बाद ----------------- ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण -------------।





Tuesday, 29 March 2016

अजवायन के गुण ।

अजवाइनको पीस कर त्वचा पर लगाने से त्वचा रोग दूर होता है।

२- फोड़ा फुन्सी में अजवाइन को पीस कर नींबू के साथ लगाने से भी आराम मिलता है।

३- पित्त रोग में अजवाइन गुड़ लेने से पित्त रोग ठीक हो जाता है।

४- यदि सर्दी लगी हो तो अदरक का रस शहद के साथ बराबर मात्रा में लेने से आराम मिलता है।

५-  जो ज्यादा अल्कोहल पीते हैं, तथा अब वो अल्कोहल वाला शराब छोड़ना चाहते हैं तो १/२ किलो ग्राम . अजवायन को ४ लीटर पानी में पकाकर जब दो लीटर बच जाये तो छानकर रख लें त़था प्रतिदिन भोजन के पहले १-१ कप पीयें।इससे लीवर ठीक रहेगा तथा शराब पीने की इच्छा भी कम होगी।

६-  २-३ ग्राम अजवायन को पाउडर करके छाछ के साथ लेने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते है।

७-  प्रसूता स्त्री के लिये १० ग्राम अजवायन को १ लीटर पानी में पकाकर १/४ शेष रहने पर छानकर सुबह - शाम पिलाने से प्रसूतिजन्य विकार नहीं होते।इससे बढ़ा हुआ शरीर भी अपनी स्थिति में वापस आ जाता है।

८-   १० ग्राम अजवायन को बारीक पीसकर उसमें १/२ नींबू का रस निचोड़ कर डालें, ५ ग्राम फिटकिरी पाउडर व छाछ को मिलाकर बालों में मलने से रूसी कम होता है तथा जुएँ भी मर जाती है।

Tuesday, 8 March 2016

ShreeRadhaRani Tatha Unki Asht Sakhiyan



श्रीराधारानी - चरण   बंदौं    बारंबार  ।
जिन के कृपा कटाच्छ तैं  रीझैं  नंदकुमार ।।

जिनके पद - रज - परस तें स्याम होयँ बेभान ।
बंदौं तिन पद - रज -कननि मधुर रसनि के खान।।

जिनके दरसन हेतु नित , बिकल रहत घनस्याम ।
 तिन  चरनन  मैं  बसै  मन  मेरौ आठौं  याम  ।।

जिन  पद  पंकज  पै  मधूप  मोहन  दृग  मँडरात।
तिन  की  नित झाँकी करन  मेरौ   मन ललचात ।।

' रा '  अक्षर  कौं  सुनत  हीं  मोहन  होत  बिभोर ।
बसैं   निरन्तर  नाम  सो ' राधा ' नित  मन  मोर ।।

     दो०--- बंदौं   श्रीराधाचरन  पावन  परम  उदार ।
               भय -बिषाद -अग्यान हर प्रेमभक्ति- दातार।।

श्री 'ललिता ' --- श्री ' ललिता ' लावण्य ललित सखि
      गोरोचन     आभा     युत   अंग   ।
      बिद्युदवर्णि      निकुंज - निवासिनि ,
     वसन      रुचिर  शिखिपिच्छ  सुरंग ।।
     इन्द्रजाल - निपुणा ,  नित    करती 
     परम    स्वादु     ताम्बूल    प्रदान   ।
     कुसुम - कला - कुशला , रचती कल
    कुसुम - निकेतन       कुसुम - वितान ।।

सखी ' विशाखा ----- सखी ' विशाखा विद्युत - वर्णा ,   
      रहती   बादल - वर्णा     कुँज 
    तारा - प्रभा     सुवसन  सुशोभित ,
    मन  नित  मग्न  श्याम - पद - कंज ।।
    कर्पूरादि      सुगन्ध - द्रव्य    युत
  लेपन    करती     सुन्दर     अंग ।
    बूटे - बेल     बनाती ,     रचती
   चित्र     विविध  रूचि  अँग - प्रत्यंग।।

' चित्रा ' --- अंग -  कांति    केसर  सी
      काँच  प्रभा  से  वसन  ललाम।
       कुंज - रंग  किंजल्क  कलित अति,
       शोभामय    सब    अंग   सुठाम   ।।
       विविध    विचित्र  वसन - आभूषण
       से    करती     सुन्दर     श्रृंगार   ।
       करती         सांकेतिक     अनेक
         देशों   की  भाषा  का  व्यवहार ।।

सखी ' इन्दुलेखा ' ----- सखी ' इन्दुलेखा ' शुचि करती
शुभ - वर्ण  शुभ  कुंज  निवास ।
अंग  कांति  हरताल  सदृश रँग 
दाड़िम  कुसुम  वसन  सुखरास ।।

करती  नृत्य  विचित्र  भंगिमा
संयुत  नित  नूतन  अभिराम ।
गायन  विद्या  निपुणा , व्रज की
ख्यात    गोपसुन्दरी   ललाम  ।।

 'चंपकलता '------ कांति   चम्पा सी, 
कुंज   तपे  सोने   के    रँग ।
नीलकण्ठ   पक्षी  के  रँग  के,
रुचिर   वसन  धारे  शुचि  अँग।।
चावभरे   चित   चँवर   डुलाती
अविरत   निज   कर - कमल  उदार ।
द्युत - पंडिता ,  विविध   कलाओं
से     करती   सुन्दर    श्रृंगार    ।।

सखी ' रंगदेवी '------- सखी रंगदेवी बसती अति
रुचिर    निकुंज ,  वर्ण  जो  श्याम  ।
कांति   कमल  केसर  सी  शोभित ,
जवा   कुसुम - रँग   वसन   ललाम  ।।
नित्य   लगाती   रुचि   कर - चरणों 
में     यावक     अतिशय   अभिराम ।
अास्था    अति   त्यौहार   व्रतों   में ,
कला - कुशल    शुचि    शोभाधाम  ।।

सखी ' तुंगविद्या ' ------- सखी  तुंगविद्या  अति  शोभित
कान्ति   चन्द्र ,  कुंकुम  सी  देह ।
वसन   सुशोभित  पीत  वर्ण  वर ,
अरुन  निकुंज ,  भरी   नव   नेह  ।।
गीत -वाद्य   से   सेवा   करती
अतिशय     सरस    सदा  अविराम ।
नीति - नाट्य - गन्धर्व  - शास्त्र --
निपुणा    रस    आचार्या    अभिराम ।।

सखी ' सुदेवी '----- सखी ' सुदेवी ' स्वर्ण- वर्ण - सी, 
वसन   सुशोभित  मूँगा  रंग ।
कुंज   हरिद्रा -  रंग   मनोहर
करती     सकल   वासना - भंग ।।
जल  निर्मल  पावन  सुरभित  से 
करती    जो    सेवा    अभिराम ।
ललित   लाड़ली की  जो  करती
बेणी -  रचना    परम     ललाम  ।।

अष्ट   सखी  करतीं  सदा , सेवा  परम  अनन्य ।
राधा - माधव - युगल की , कर  निज जीवन धन्य।।
इनके  चरण  सरोज  में  ,   बारम्बार     प्रणाम। 
करूणा  कर  दें  श्रीयुगल - पद - रज - रति  अभिराम ।।
                     



Wednesday, 2 March 2016

SreeRadhaJee Ki Aarti.



आरती    श्रीबृषभानु  लली    की ।
सत - चित - आनंद-  कंद - कली     की ।। टेक ।।

भयभंजिनि     भव - सागर - तारिनि ,
पाप - ताप - कलि - कल्मष - हारिनि , 
  दिब्यधाम - गोलोक -  बिहारिनि ,
जनपालिनि     जगजननि    भलीकी  ।। १ ।।

अखिल  बिस्व  आनंद - बिधायिनि , 
 मंगलमयी            सुमंगलदायिनि ,
  नंदनंदन - पद - प्रेम    प्रदायिनि ,
अमिय - राग - रस - रंग - रलीकी ।।२ ।।

नित्यानंदमयी     अाह्लादिनि ,
आनंदघन - आनंद - प्रसाधिनि ,
रसमयी ,   रसमय - मन - उन्मादिनि ,
सरस   कमलिनि  कृष्ण - अलीकी ।। ३ ।।

नित्य  निकुंजेस्वरी  रासेस्वरि ,
परम   प्रेमरूपा    परमेस्वरी , 
गोपिगणाश्रयि       गोपिजनेस्वरि ,
बिमल - बिचित्र - भाव - अवलीकी ।। ४ ।।

                     ------------------ ० ----------------