Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Saturday, 24 January 2015

मैंली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ




मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ,
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शर्माऊँ 
मैली चादरओढ् के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ 

तुमने इस संसार में भेजा देकर निर्मल काया
मैंने इसको आकर प्रभु जी ऐसा दाग लगाया
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुड़ाऊँ 
मैली चादऱ ...

सुन्दर मन और वाणी पाकर भजन कभी न गाया
नैन मूँदकर हे पर्मेश्वर कभी न तुमको ध्याया 
मन वाणी की तारें टूटी
अब क्या भजन सुनाऊँ 

मैली चादर ओढ़ के...

इन पैरों से कभी न चलकर द्वार तुम्हारे आया
जहाँ जहाँ हो पूजा तेरी शीश कभी न झुकाया
हे हरिहर मैं हार के आया अब क्या हार चढ़ाऊँ 

मैली चादर ओढ़ के...


Monday, 22 December 2014

Shri Krishna dwara Radha Rani ki Prem Pariksha



Ek baar Shri Krishna ko RadhaRani ki pariksha lene ki ichha hui. To unhone apna bhes badal ek gwalin ka roop banaya aur Barsane, jahan Radharani rehti thi, chale gaye. Jab Radharani ne us gwaalin ko dekha, to vah atyant prasann ho uthin. Unke man ke harsh ka karan yeh tha ki us gwalin me unhe shri Krishna ki chhavi dikh rahi thi. Unhe laga ki shri Krishna se milti chhavi wali ye gwalin avashya Vrindawan se ayi unki koi behan ya sambandhi hongi.

Radharani ne us gwalin se kaha "behen!tum atyant sunder ho! tumhara roop dekhkar to chandrama aur surya bhi sharma jaen. Tumhare prati mere man me apaar shradhha ho rahi hai. mera man atyant anandit ho raha hai. Tum mere Shyam Sunder si dikhti ho!"

Gwalin ka bhes dhare Shri Krishna bole "Tum Radha ho na? Maine tumhare saundarya aur gunon ke baare me bohot suna hai, isliye milne ki ichha hui aur mai swayam hi yahan khichi chali ayi. Tumhare darshan se mere man ko apaar shanti ki anubhooti hui hai". Itna keh kar vo udaas ho gaye.
Radharani unki udaasi dekhkar boli"behen! aisi kya baat hui ki tum udaas ho gyi?"

ShriKrishna ne kaha "behen!ek din mai dahi bechne ja raahi thi ki raste me braj ke chhore Krishna ne mere sath chhal kiya. Usne meri matki fod daali aur mujhse maafi bhi nahi maangi. Usne apne gwal mitron ke sang mil ke meri bohot hasi udai. Jaati ka to gwala hai, upar se rang kaala hai, aur itna abhimaani! aur tum ho ki uski prashansa karti ho, uski chhavi se anandit hoti ho.usse prem karti ho jabki vo to tumhare yogya bhi nahi!"

Aise vachan sun Radharani boli "aise vachan na bolo sakhi. Mai unke baare me aise shabd nahi sun sakti. Tumhare dhanya bhaag ki unhone tumhari matki fodi, is bahane unhone tumhe darshan diye aur tumpar kripa barsai. unke mangal darshanon ke liye to sabhi devta bhi taraste hain. Tum gwalon ko chhota samajhti ho jabki unke jaisa koi dhanya nahin, jo tan man se shri Krishna ki sewa me lage rehte hain aur unke sath van me dhenu charaate hain. Sakhi tumne unhe kala kaha, unke shyam rang ke samaksh to gaiyya bhi apna gaur rang bhul jaati hai. Vo hi mere praan dhan hai, mere sarvasva hain."

Radharani ke alaukik prem ko darshate shabdon ko sun shriKrishna apne vastavik roop me aa gaye aur apni priya ka naam lekar unhe pukaara "Radhe!" Radherani ne jaise hi apne Shyam Sunder ko apne sameep paaya, vo bhaav vibhor hokar apne priyevar ke hriday se jaa lagin.

Jai Jai Shri Radhe!

Sunday, 14 December 2014

Surdasji ke Pad-2



मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै  

जैसे उड़े जहाज को पंछी 
फिरी जहाज पर आवै 

कमल नयन को छाड़ि महातम 
और देव को ध्यावै 

परम गंग को छाड़ि पियासौ 
दुरमति कूप खनावै 

जिहिं मधुकर अंबुज रस चाख्यौ 
क्यों करील फल खावै 

सूरदास प्रभू कामधेनु तजि 
छेरी कौन दुहावै 

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बाँसुरी बजाई आछे रंग सौं मुरारी 

सुनि कै धुनि छूटि गई संकर की तारी 
वेद पढ़न भूलि गये ब्रहमा ब्रहमचारी

रसना गुन कहि न सकै 
ऐसी सुधि बिसारी 

इन्द्र सभा थकित भइ 
लगी जब करारी 

रंभा की मान मिट्यो 
भूली नृतकारी 

जमुना जू थकित भई 
नहीं सुधि संभारी 
  
सूरदास मुरली है 
तीन लोक प्यारी। 

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(ref. sur sagar saar)

Saturday, 13 December 2014

Soordas Ji ke Pad



कमल नयन हरि करो कलेवा

माखन रोटी सद्य जाम्यो
दधि भाँति  भाँति के मेवा

खारिक दाख चिरौंजी किशमिश 
उज्जवल गरी बादाम

सझरी सेव छुहारे पिस्ता
जे तरबूजा नाम

अरु मेवा बहु भाँति भाँति
है षटरस के मिस्ठान

सूरदास प्रभु करत कलेवा
रीझे श्याम सुजान।
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जेवत कान्ह नन्द एक ठौरे

कछु खात लपटात दोउ कर
बाल केलि अति भोरे

बड़ा कौर मेलत मुख भीतर
मिरिच दसन टकटौरे

तीछन लगी नैन भरी आये
रोवत बहार दौरे

फूकत बदन रोहिणी ठाढ़ी
लिये लगाई अँकोरे

सूर श्याम को मधुर कौर दे
कीन्हे तात निहोरे।जेवत कान्ह नन्द एक ठौरे

कछु खात लपटात दोउ कर
बाल केलि अति भोरे


बड़ा कौर मेलत मुख भीतर
मिरिच दसन टकटौरे

तीछन लगी नैन भरी आये
रोवत बहार दौरे

फूकत बदन रोहिणी ठाढ़ी
लिये लगाई अँकोरे

सूर श्याम को मधुर कौर दे
कीन्हे तात निहोरे।
…………………………………………


मैया मोहि दाऊ बहुत खिजायो

मोसो कहत मोल को लीन्हौ
तू जसुमति कब जायो

कहा करौ इहि रिस के मारै
खेलन हौ नहीं जात

पुनि पुनि कहत कौन है माता
को है तेरो तात
गोरे नन्द जसोदा गोरी
तू कत श्यामल गात

चुटकी दै दै ग्वाल नचावत
हसत सबै मुस्कात
तू मोहि कौ मारन सीखी
दाउहि कबहु न खीजै

मोहन मुख रिस की ये बातें
जसुमति सुनी सुनी रीझे
सुनहु कान बलभद्र चबाई
जनमत ही को धूत

सूर श्याम मोहि  गोधन की सौं
हों माता तू पूत
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मैय्या री मोहे माखन भावे
जो मेवा पकवान कहती तू
मोहि नहि रूचि आवै

ब्रज जुवति एक पाछै ठाढ़ी
सुनत श्याम की बात

मन मन कहती कबहुँ अपने घर
देखौं  माखन खात

बैठे जाई मथनिया कै ढिग
मैं तब रहौं छपानी

सूरदास प्रभू अंतर्यामी
ग्वालिन  मन की जानी।
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(Ref. Sur Sagar Saar)


Wednesday, 19 November 2014

भजन


प्रभुजी करो मुझे भव पार 
तुम जैसा नहीं उदार 
प्रभुजी करो मुझे भव पार।

मुनि के संग ताड़का मारी 
गौतम नारी अहिल्या तारी 
हरि हरो कलेश हमार 
प्रभुजी करो मुझे भव पार। 

मिथिला सभा में शिव धनुष तोड़ा 
लक्ष्मी पति ने चाप चढ़ाया 
हरि भक्तन हर्ष अपार 
प्रभुजी करो मुझे भव पार।  

सीता के संग ब्याह रचायो 
दशरथ - जनक के भेद मिटायो 
बह चली प्रेम की धार 
प्रभुजी करो मुझे भव पार।  

भला बुरा मैं प्रभूजी थारो 
करो न निज चरणन से न्यारो 
आपने दास को लेउ उबार 
प्रभुजी करो मुझे भव पार। 


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Tuesday, 18 November 2014

प्रभु भजन



प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना 
जगत में न कोई है हरि के समाना 
प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना। 

मेरे भाग्य कितना है जाने आज भारी 
जो आये हैं दीनन के दुःख दर्द हारी 
करा पार जाने का मुझसे बहाना 
प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना। 

बहुत काल कीनी थी मैंने मजूरी 
मिली आज मनमानी तनख्वा पूरी 
पुनः मुझको भगवान दरस दिखाना 
प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना। 

केवट की भक्ति पे भगवन हर्षाये 
उसी वक्त देवों  ने बहु पुष्प बरसाए 
कहें राम जी हँसकर तू है बुद्धिमाना 
प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना। 

कृपा सिंधु बोले सुनो भक्त भाई 
करो भक्ति मेरी मिलो मुझसे आई 
चरण भक्ति केवट प्रभू की महाना 
प्रभुजी मैंने पाया है पावन खज़ाना। 


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भजन


आओ आओ कृष्ण कन्हैया 
भक्तों का दुःख दूर करैया 
आओ आओ कृष्ण कन्हैया

भक्त तुम्हारे तुम्हे पुकारे 
प्रभुजी तुम्हारी बाट निहारे 
तुम बिन दुखी यशोदा मैय्या 
आओ आओ कृष्ण कन्हैया

घट घट वासी अंतर्यामी 
प्रभु तुम हो सर्व जगत के स्वामी 
बलदाऊ जी के छोटे भैय्या 
आओ आओ कृष्ण कन्हैया

आओ आकर रास रचाओ 
भक्त जनो को सुखी बनाओ 
मनमोहन धेनु चरैय्या 
आओ आओ कृष्ण कन्हैया

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