Swayam me anekon kamiyan hone ke bavjood mai apne aap se itna pyaar kar sakta hun

to fir doosron me thodi bahut kamiyon ko dekhkar unse ghrina kaisi kar sakta hun-

anmol vachan, Swami Vivekanand Ji


Sunday, 16 August 2015

Durga Ma Ki Aarti (ओम् जग जननी जय जय ) ।


 " नीरांजनं सुमंगल्यम् कर्पूरेण समन्वितम् ।
   चन्द्रार्कवन्हि सदृशं महादेवी नमोस्तुते  ।।"

जग जननी जय जय, माँ जग जननी जय जय ।
भयहारिणी भवतारिणी भवभामिनि जय जय  ।।१ ।।ओम् जग जननी 

तू ही सत-चित-सुखमय , शुद्ध ब्रह्मरूपा  ।
सत्य सनातन सुन्दर , पर-शिव सुर भूपा ।।२ ।।ओम् जग जननी

आदि अनादि अनामय , अविचल अविनाशी ।
अमल अनन्त अगोचर , अज आनन्द राशी ।।३।।ओम् जग जननी 

अविकारी अघहारी , अकल कलाधारी    ।
कर्ता विधि भर्ता हरि, हर संहारकारी ।।४ ।।ओम् जग जननी

तू विधिवधू , रमा तू , उमा महामाया    ।
मूलप्रकृति विद्या तू , तू जननी , जाया।।५।।

राम ,कृष्ण तू सीता, ब्रजरानी राधा    ।
तू वांछाकल्पद्रूम , हारिणि सब बाधा  ।।६ ।।ओम् जग जननी

दशविद्या, नवदुर्गा ,  नाना शस्त्र करा    ।
अष्टमातृका , योगिनि , नव नव रूप धरा ।।७ ।।ओम् जग जननी

तू परधाम निवासिनि , महाविलासिनि तू   ।
तू ही शमशान विहारिनि , ताण्डवलासिनि तू ।।८ ।।ओम् जग जननी

सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या , तू शोभाधारा     ।
विवसन विकट-सरुपा ,  प्रलयमयी धारा ।।९।।ओम् जग जननी

तू ही स्नेह-सुधामयी , तू अतिगरलमना   ।
रत्न विभूषित तू ही , तू ही अस्थितना    ।।१०।।ओम् जग जननी

मूलाधारनिवासिनि , इह पर सिद्धि प्रदे   ।
कालातीता काली , कमला तू वर दे   ।।११।।ओम् जग जननी

शक्ति शक्तिधर तू ही , नित्य अभेदमयी   ।
भेद प्रदर्शिनी वाणी , विमले  वेदत्रयी  ।।१२।।ओम् जग जननी

हम अतिदीन दुखी माँ , विपद जाल घेरे   ।
हैं कपूत अति कपटी , पर बालक तेरे    ।।१३।।ओम् जग जननी

निज स्वभाववश जननी , दया दृष्टि कीजै  ।
करूणा कर करूणामयि , चरण -शरण दीजै ।।१४ ।।ओम् जग जननी